तुम

लफ्जों की दरकार किसे
मेरी खामोशी ही काफी है ,
तुमसे बात करने को
है गुप अंधेरा चारों ओर दूर तलक,
बंद आंखें ही काफी है तेरा चेहरा देखने को,
दूर हो या पास तु मेरे,
तेरा साथ हो या ना,
यादें काफी है तेरा एहसास करने को
बारिश का भीगापन
या सर्दियों की धूप,
यादों के मौसम ही काफी है
तुझे महसूस करने को
मान लिया है तुझे अपना
क्या फर्क है तू माने या ना
तेरा नाम ही काफी है
तमाम उम्र जीने को

डॉ भावनेश पंचाल


टिप्पणी करे